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पुरी रथयात्रा ( puri rath yatra ) का प्रार्दुभाव कैसे हुआ

पुरी रथ यात्रा ( puri rath yatra ) का प्रार्दुभाव कब और कैसे हुआ


Puri rath yatra kyo nikali jati hai

Puri rath yatra भारत में मनाये जाने वाले अनेको त्यौहारों में से हर एक त्योहार की अपनी अलग विशेषता है चूंकि यहां कई देवी-देवताओं की अपनी अलग महता है, उसमें भगवान विष्णु (God vishnu) के दस अवतारों में एक जगन्नाथ जी है जिनकी पूजा लोग बहुत की निष्ठा से करते हैं जो अषाढ़ (Aashadh) मास के शुक्ल पक्ष के द्वितीया (dwitiya)  तिथि को मनाया जाता है। Puri rath Yatra इस वर्ष यानि 2019 में यह पर्व 4 july को मनाई जा रही है इस रथ यात्रा का आयोजन चूंकि बहुत ही वृहद रुप में होता है इसलिए इसकी तैयारी भी बहुत पहले से की जाती है।

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पुरी की रथ यात्रा (Rath yatra)  बहुत ही प्रसिद्ध है वैसे तो भारत के हर कोने में रथ यात्रा निकाली जाती है लेकिन पुरी की रथ यात्रा को देखने देश के हर क्षेत्र से लोग आते हैं ।

माघ शुक्ल पक्ष द्वितीय को निकाली जाती रथ यात्रा


जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा (jagnnath puri rath yatra ) उड़ीसा, मथुरा, काशी, कानपुर, अहमदाबाद एवं जम्मू कश्मीर (jammu kashmir) , दिल्ली (Delhi) , पंजाब (Panjab), आंध्रप्रदेश (aandhrpradesh)  जैसे राज्यों में कड़ी सुरक्षा में निकली जायेगी ।
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इन देशों में निकाली जाती है जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा 
विदेशी धरती पर भी भगवान जगन्नाथ पुरी के भक्तों की कमी नहीं भारत के सटीक विदेशी धरती बांग्लादेश (Bangladesh)  एवं लंदन (london) में भी निकाली जायेगी ।
Puri rath yatra kab nikali jati hai

यहां की रथ प्राचीनतम कला की अद्भुत मिसाल है यह लकड़ी का बना हुआ मिनार (minar)  जैसा प्रतीत होता है जिसपर सोने और चांदी के पतरें मढ़ी हुई है जिसमें अनेकों नक्काशी और चित्रकारी का  सुंदर नजारा अवीस्मर्णीय है यह रथ विशाल है इसकी ऊंचाई 137 मीटर है तथा बीच का स्थान 107लम्बा  उतना ही चौड़ा वर्गाकार में होता है।

अब इस रथ पर भगवान जगन्नाथ (jagnnath) को रखा जाता है इनके साथ इनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी विराजमान होती है इस रथ में 16 पहिये होते हैं रथ से सटे लकड़ी के घोड़े बने होते हैं लेकिन रथ (Rath)  को खींचने का काम रस्सी द्वारा किया जाता है । इस रथ (Rath)  को विधिपूर्वक एवं ससम्मान उड़ीसा (odisa) के मुख्य मार्केट से गुजरते हुए ले जाया जाता है श्रद्धालुओं की असीम निष्ठा से इस दिन रस्सी खींचने की होड़ लगी रहती है और रस्सी के छूने मात्र से भक्त धन्य हो जाते हैं।

भगवान के इस रथ को श्रद्धालु खींच कर जगन्नाथ मंदिर से उनके मौसी के घर गुंडीचा मंदिर (Gudichaa temple) ले जाते हैं वापस इस रथ को अपने गणतव्य स्थान पर लाया जाता है जिसे बहुड़ा यात्रा (bahuda yatra) कहा जाता है यह सात दिनों तक चलता है इस दरम्यान भगवान की पूजा अर्चना और हरि भजन होता है एवं विधिवत ब्राह्मणों को दान दक्षिणा दी जाती हैं ।

क्यो निकाली जाती है रथ यात्रा

वर्तमान किंवदंतियां ये है कि राजा रामचंद्रदेव ( Raja Ramchndrdev) जगन्नाथ भगवान के भक्त थे उन्होंने यवन महिला से विवाह करने के बाद इस्लाम धर्म को अपना लिया था तभी से उनका मंदिर में प्रवेश निषेध कर दिया गया ऐसा माना जा रहा है उनके लिए ही जगन्नाथ यात्रा (jagnnath yatra)  निकाली जाती हैं।
Puri rath yatra pradurbhav kaise kare

दूसरी मान्यता यह है पौराणिक स्नान पूर्णिमा (purnima) यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन जगत के नाम कहलाने वाले जगन्नाथ का जन्म हुआ था इसी दिन भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रत्नसिंहासन से उतार कर उन्हें मंदिर के पास मंडप में ले जाया जाता है और फिर 108 कलशों से उनका शाही स्नान ( shahi snan) कराया जाता है जिस कारण वे बीमार हो जाते हैं उन्हें ज्वर हो जाता है इस कारण भगवान को पन्द्रह दिन तक किसी विशेष कमरे में रखा जाता है जिसे ओसर घर कहां जाता है इस दौरान प्रभु को मंदिर के प्रमुख पुजारी और वैध के अलावा कोई अन्य नहीं देख सकता इस दौरान मंदिर के प्रतिनिधि अलाराप (alarap) की मूर्ति की स्थापित कर उनकी पूजन किया जाता है । एक पखवाड़े के बाद भगवान अपने भक्तों को दर्शन देते है जिसे वहां लोग यौवन नैत्र ( yauwan naitr) उत्सव भी कहा जाता है । अपने बड़े भाई और बहन को साथ साथ  नगर भ्रमण कराया जाता है इसलिए श्रद्धालु उत्साह से इस दिन का बेसब्री से प्रतीक्षा करते रहते हैं।


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